Steve Jobs Stanford University Speech | Gajab ka Motivation

Steve Jobs Stanford University Autobiography | In Hindi

इंट्रोडक्शन:  नमस्कार दोस्तों  Sabse Bhadiya Kahaniya | Short Hindi Stories में आपका स्वागत हैं आज मैं बहुत है बड़े शक्षियत के बारे में आपको बताने जा रही हूँ ।

अगर आपके हाथ में अभी Apple का फोन हैं तो में आपको बता दूं की यही शक्षियत ही उसके founder है तो। वैसे तो आप सब उनको जानते होंगे।


जी हां वो Steve Jobs ही हैं। पर क्या आपको उनके जीवन के बारे में और कुछ भी पता है?


अगर नहीं तो कोई बात नहीं आज आपको उनके कठिन जीवन के बारे में सब पता चल जाएगा
। 

तो चलिए बिना किसी देरी के शुरू करते हैं।

Steve Jobs Stanford University Motivational Speech In Hindi 

स्टीव जॉब्स 

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Steve Jobs Stanford University Speech

चित्र स्तोत्र: Shutterstock

 ( जन्म: 24 Febraury 1955 – मृत्यु: 10 October 2011, 56 उम्र)

स्टीव जॉब्स का motivation से भरा speech स्टीव जॉब्सApple incorporation के founder ने ये कमाल का प्रोत्साहन से भरा भाषण Stanford University के students को 12 जून 2005 को दिया था । उनके समझदार और विचारशील खयालात काफी अच्छे हैं ।

आज जब आप दुनिया की एक सबसे बेहतरीन University में पढ़ कर निकल रहे हैं और मैं आपके सामने खड़ा हूँ तो मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है । मैं कभी college में नहीं पढ़ा 
हूँ।
सच कहूँ तो किसी college से graduate होने का ये मेरा सबसे नासदिकी अनुभव है । 
आज मैं आपको अपनी ज़िन्दगी की तीन कहानियाँ सुनाना चाहता हूँ । बस कोई बड़ी – बड़ी बातें नहीं | केवल तीन कहानियाँ )

पहली कहानी (1st Story)

पहली कहानी है बिंदु से बिंदु जोड़ने की ।
पहले 6 महीनों के बाद मैं Reed College से निकल गया . . और 18 महीने वहाँ आता – जाता रहा जब तक की मैंने कॉलेज पूरी तरह से नहीं छोड़ दिया तो मैंने क्यों छोड़ा ? 
शुरुआत मेरे पैदा होने से पहले होती है ।

मेरी माँ एक जवान, बिन – ब्याही कॉलेज की student थीं, और उन्होंने मुझे गोद देने के लिए सोच लिया था । 

मेरी मां ये चाहती थी कि मुझे कॉलेज में पढ़ा हुआ ही कोई गोद ले, इसलिए मेरे पैदा होने से पहले ही एक Lawyer Couple के साथ बातचीत कर ली गई थी । 
बस मेरे होते ही उन्होंने आखरी मिनट पर तय किया कि उन्हें एक लड़की चाहिए थी |

इसलिए मेरे माता – पिता, जिनका नाम गोद लेने वाले इच्छुक couples की लिस्ट में अगला था उनका को आधी रात को फ़ोन कर के पूछा गया : 


” एक बच्चा है लड़का ; क्या आप लेना चाहेंगे ? उन्होंने कहा, जरूर ‘ मेरी पैदा करने वाली माँ को बाद में पता चला कि मेरे माता – पिता दोनों कभी कॉलेज से नहीं पढ़े । 
उन्होंने आखरी समय कर गोद देने के कागजात पर दस्तखत करने से इनकार कर दिया । 
कुछ महीनों के बाद जब उन्होंने उन्हें यकीन दिलाया कि मैं जरूर किसी दिन कॉलेज जाऊंगा तब वह मानीं ।
और 17 साल बाद में कॉलेज गया मगर नादानी में मैंने वो कॉलेज चुना जो Stanford जितना ही महंगा था।
और मेरे नौकरीपेशा माँ – बाप की सारी जमा पूँजी मेरी fees में निकलने लगी | छः महीने बाद मुझे इसमें कोई फायदा नहीं दिख रहा था |

मुझे कुछ नही पता था कि मैं ज़िन्दगी में क्या करना चाहता हूँ और वो खोजने में कॉलेज कैसे मेरी मदद करेगा और मैं यहाँ अपने माता – पिता की जिन्दगीभर की कमाई खर्च कर रहा था । 

इसलिए मैंने college छोड़ देने का तय किया इस विश्वास के साथ कि सब ठीक होगा | 
उस वक्त बहुत डर लग रहा था मगर अब पीछे मुड कर देखता हूँ तो लगता है वो मेरा बेहतरीन desicion था |

निकलते ही मैंने वो classes लेना बंद कर दिया जिनमे मेरा मन नहीं लगता था, और बस उनमे जाने लगा जिनमे मुझे interest था। सब कुछ अच्छा नहीं था वैसे ।

 मेरे पास सोने को कोई जगह नहीं थी इसलिए मैं दोस्त के कमरे में फर्श पर सोता था, soda की 50 बोतलें जमा करता था ताकि खाना खरीद सकु।

और में हर रविवार शहर से बाहर तक 7 मील पैदल चलता था ताकि हरे कृष्णा मंदिर में हफ्ते का इकलौता अच्छा खाना खा सकू।

 मुझे ये सब बहुत अच्छा लगता था ।

बाद में ये समाज अपनी उत्सुकता और मन के अनुसार किया था, लिए अनमोल साबित हुआ |

 जैसे कि:

Reed कॉलेज शायद देश में सबसे अच्छी Calligraphy सिखाता था पूरे campus में हर poster, हर दरवाज़ का हर label खूबसूरत तरीके से लिखा गया था । 
क्योंकि मैं कॉलेज छोड़ चुका था और मुझे बाकि classes में जाने की ज़रूरत नहीं थी, मैंने तय किया कि मैं Calligraphy  सीखूगा |

मैंने  Serif and San Serif Typefaces, अलग – अलग अक्षरों के मिलाव के बीच में जगह रख कर लिखना, वो सब जो सुन्दर लेखनी को और सुन्दर बनाता है ।


वह सब सीखना शुरू किया ये सब बहुत खूबसूरत, प्राचीन, कलाकारात्मक और अच्छा हआ था; ऐसा कुछ जो Science नहीं बाँध सकती, और मैं इससे बहुत आकर्षित था |
 इस सब का मेरी ज़िन्दगी में देखा जाए तो कोई खास फर्क पढ़ने वाला नहीं था। मगर दस साल बाद जब हम अपना पहला Macintosh Computer बना रहे थे, यह सब मझे याद आ गया । 
और हमने Mac में यह सब Design किया | मेरा पहला computer था ऐसी खूबसूरत लेखनी वाला |

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Steve Jobs Stanford University Speech


चित्र स्तोत्र: Shutterstock

अगर उस वक्त कॉलेज में मैन उस कोर्स को नहीं किया होता, तो Mac के इतने सारे Typefaces नहीं होते और कायदे से बराबर जगह छोड़कर लिख हुई लेखनी नहीं होती | 

और क्योंकि Windows ने वह Mac से ऐसा का ऐसा नकल कर लिया था इसलिए शायद किसी भी निजा कंप्यूटर में यह नहीं है ।
अगर मैं कॉलेज नहीं छोडता तो मैं उस Calligraphy classes में कभी नहीं जा पाता, और निजी कंप्यूटर में ये खूबसूरत लेखनी नहीं हो पाती जो अभी है ।

निश्चित ही जब मैं कॉलेज में था तब ये बिंदु जोड़ना मेरे लिए नामुमकिन या। मगर दस साल बाद मुड कर देखने पर सब कुछ साफ़ – साफ़ नज़र आता है ।

 दुबारा कह रहा हूँ . आप आगे देख कर बिंदु नहीं जोड़ सकते; आप सिर्फ पीछे देख कर ही उन्हें जोड़ पाते हैं ।

इसलिए आपको यह विश्वास रखना होगा कि भविष्य में ये बिंद् ज़रूर जुड़ेंगे | 

आपको कुछ चीजों में विश्वास रखना होगा – आपकी अन्दर की आवाज, किस्मत, जीवन, कर्म, सब कुछ इस तरीके ने मुझे कभी निराश नहीं किया है, और इसने मेरी जिन्दगी में बहुत से बदलाव किये हैं ।

दूसरी कहानी (2nd Story)

मेरी दूसरी कहानी प्यार और उसे खोने की है । में युशनसीब था – ज़िन्दगी में जो मैं चाहता वह मैं जल्दी ही जान गाया वजा मैंने Apple की शुरुआत 20 साल की उम में मेरे माता – पिता के गेराज में की हमने बहुत मेहनत की।


 और 30 सालों में Apple गेराज में हम दोनों से बढ़कर एक 52000 बिलियन की कंपनी बन गई जिसमे 4000 मुलाज़िम हैं ।
हमने पहले साल में अपना बेहतरीन उत्पाद निकाला या मैकिन्टोश था और 30 साल का हो गया था और फिर मुझे कंपनी से निकाल दिया गया कोई आपको आपकी ही कंपनी से कैसे निकाल सकता है कोई?
जब Apple आगे बढ़ने लगी तो हमने रियाईस आदमी को नियुक्त किया जो मुझे लगा था मेरे साथ कंपनी चलाने के लिए बहुत योग्य है, और पहले साल तक चीजें ठीक भी थीं । 
मगर धीरे – धीरे हमारे नज़रियों में बदलाव आने लगा और हम अलग गण बन गए जब यह हुआ, तब बोर्ड ऑफ डायरेक्टरी ने उसका साथ दिया तो 30 की उम्र में मैं वहाँ से बाहर
पूरी होगया।

 दुनिया के सामने बाहर । मेरी व्यसक जिन्दगी का जो सारा ध्येय था वो चला गया था, और मैं बिखर गया था । 

कुछ महीनों तक मैं समझ नहीं पाया क्या करूँ । 
मुझे लगा मैंने पिछली पीढ़ी के व्यापारियों को शर्मिंदा किया है – मानों मैंने रेस में पकडाए जाने वाला मेडल मुझे मिलने के वक्त गिरा दिया हो ।

मैं डेविड पेकार्ड और बॉब नॉयस से मिला स्तिथि इतनी बिगाड़ देने के लिए माफी मांगने के लिए मैं एक महराईस आदमी था, और मैंने वैली से भाग जाने का सोचा |

मगर आहिस्ता आहिस्ता मुझे एहसास हुआ कि मैं अभी भी जो करता था उससे मुझे बहुत प्यार था |

 Apple में जो हुआ उससे वहाँ कोई बदलाव नहीं आया था । 
मुझे जानबूजकर कर दिया गया था, मगर मैं अभी भी प्यार में था । 
इसलिए मैंने नई शुरुआत करने का सोचा उस समय ऐसा नहीं लग रहा था मगर बाद मै यकीन हआ कि Apple से निकाल दिए जाना मेरे लिए अच्छा साबित हआ ।
कामयाब होने के बोझ की जगह नई शुरुआत मैंने ले ली जहाँ मुझे आगे का कुछ पता नहीं था । इसने मुझे अपने सबसे कलात्मक समय में जाने की छूट दी । 

अगले पांच सालों में मैंने NexT और पिक्सर नाम की कंपनियां शुरू की और एक कमाल की औरत का प्यार पाया जो मेरी पत्नी बनी |

 पिक्सर से दुनिया की पहली कंप्यूटर से बनी हुई एनिमेटेड फिल्म बनी, टॉय स्टोरी, और अब यह दुनिया का सबसे कामयाब एनीमेशन स्टूडियो है । 

समय ने ऐसी पलटी खाई, एप्पल ने NexT खरीद लिया, मैं वापस एप्पल में चला गया, और जो तकनीक हमने NexT में तैयार की थी वो अब एप्पल में इस्तेमाल होती है ।

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Steve Jobs Stanford University Speech

चित्र स्तोत्र: Shutterstock

लौरेने और मैं साथ में बहुत खुश हैं । मुझे पूरा विश्वास है कि इसमें से कुछ भी नहीं होता अगर मुझे Apple से निकाल नहीं दिया गया होता | 

दवाई का स्वाद खराब था, पर शायद मरीज़ को उसकी जरूरत थी |
कभी – कभी जिन्दगी आपके सर पर ईट दे मारती है । भरोसा रखें | 
मझे यकीन है कि मैं केवल इसलिए आगे बढ़ता गया क्योंकि मैं अपने काम से प्यार करता था ।

आपको वह ढूंढना होगा जिसे आप प्यार करते हैं । यह काम के लिए भी उतना ही जरूरी है जितना साथी के लिए आपका काम आपकी ज़िन्दगी का एक बड़ा हिस्सा बनता है।

 और अन्दर से संतुष्ट रहने के लिए ये ज़रूरी है कि आप काम से प्यार करते हैं ।

भगवान जानते हो कि आप में जसबा हैं काम तब ही होता है जब आप अपने काम से प्यार करें अगर आपको अभी तक वह नहीं मिला है, तो खोज जारी रखिो कम में मत मान जाइए । जैसा दिलों के हर मामले में होता है ।

जब आपको वो मिलेगा तब आपको पता चल जायेगा | और हर महान रिश्ते की तरह, यह भी साल दरअसल और अच्छा होता जाता है । 

तो जब तक ना मिले खोजते रहिये । कम में मत मानिए।

तीसरी कहानी (3rd Story)

मेरी तीसरी कहानी मौत के बारे में है । जब मैं 17 साल का था तब मैंने कहीं पढ़ा था : “ अगर आप अपना हर दिन इस तरह जियेंगे जैसे वो आपका आखरी हो, तो । एक दिन आप जरूर सही होंगे ।

 इसने मुझ पर एक गहरी छाप छोड़ी, और तबसे, पिछले 33 सालों से, मैंने हर सुबह आईने में देखा है और खुद से सवाल किया है :

  ‘ अगर आज मेरा आखरी दिन है, तो क्या मैं वह करना चाहता हूँ जो मैं आज करने वाला है? और जब भी कई दिनों तक जवाब मुझे नहीं में मिलता तो मैं समझ जाता हूँ कुछ बदलाव करने की जरूरत है ।

ये याद रखना कि मैं जल्दी ही मरने वा कमी के बड़े नतीजे लेने के लिए एक खास खया सब कछ – सारी बाहरी उम्मीद, सारा गर्व, हार और कि मैं जल्दी ही मरने वाला हूँ मेरे लिए अपनी हुआ | क्योंकि सब कुछ सारी । Bahari umeedo sara garw haar or

शर्मिदगी – सब कुछ मौत के सामने कुछ नहीं हैं । जो सबसे जरूरी है बस वही रह जाता है । ये याद रखना कि आप मरने वाले हैं सबसे अच्छा तरीका है कुछ खोने के डर के जाल से बचने का जो मैं जानता हूँ । 
आप पहले ही नग्न हैं । इसलिए क्यों न अपने दिल की ही सुन लें । साल भर पहले मुझे पता चला कि मुझे कैंसर है ।

 सुबह 7 : 30 बजे मेरा स्कैन हआ, जिसमे मेरी पैंक्रियास में एक ट्युमर साफ दिखाई दे रहा था । मैं यह भी नहीं जानता था कि पंक्रियास होती क्या है । डॉक्टर ने मुझे साफ़ – साफ बताया कि यह एक तरह का कैंसर है जिसका कोई इलाज नहीं है, और मुझे तीन से सात महीनों से ज्यादा जीने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए ।

 मेरे डॉक्टर ने मुझे घर जाने की सलाह दी और अपना सब काम अच्छे से कर लेने को कहा, अगर साफ साफ बोलू तो डॉक्टर तब बोल रहे थे कि मरने से पहले तैयारी कर लो । इसका मतलब है अपने बच्चों से कुछ ही महीनों में वह सब कहने की कोशिश करना जो आपने सोचा था अगले 10 सालों में कहोगे ।

 इसका मतलब है हर चीज़ अपने परिवार के लिए तैयार कर के रखना ताकि उन्हें कम से कम परेशानी हो । इसका मतलब है लोगों से अलविदा कह लो । 

मैं अपनी बिमारी की जानकारी के साथ पूरे दिन रहा । उस दिन शाम को मेरी बायो स्कैन हुई, जिसमे उन्होंने मेरे गले के अन्य एक एण्डोस्कोप डाला, जो मेरे पेट से होता हुआ मेरी अंतड़ियाँ तक पहंचा, उन्होंने मेरी पैंक्रियास में सुई घुसाई और ट्यूमर सेल निकालीं |

 मैं बेहोश था, मगर मेरी पत्नी, जो वहाँ थी, उसने ने बताया कि जब उन्होंने वो सेल माइक्रोस्कोप के नीच रख के देखी तो डॉक्टर रोने लगे क्योंकि पता चला ये एक ऐसा अनोखे तरह का पैनक्रेअटिक कैंसर था जो ऑपरेशन से ठीक हो सकता था |

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Steve Jobs Stanford University Speech

चित्र स्तोत्र: Shutterstock

 मेरा ऑपरेशन किया गया और अब मैं ठीक हूँ । मौत के इतना पास मैं और कभी नही था, और मैं उम्मीद करता हूँ अगले कुछ दशकों तक मैं इतना पास ना जाऊं इससे निकल आने के कारण में आप सबसे यह उससे और ज्यादा निश्चित तौर पर कह सकता हूँ जो मैंने आपसे तब कहा था जब मौत एक जरूरी मगर बौद्धिक विचार थाः मरना कोई नहीं चाहता जो लोग स्वर्ग जाना चाहते हैं वे भी वहाँ पर मर कर नहीं जाना चाहते । मगर फिर भी मौत वो जगह है जहाँ सबको जाना है ।

 इससे कोई नहीं बच पाया है । और यही होना चाहिये, क्योंकि मौत अवश्य ही जिन्दगी की सबसे बड़ी खोज है । ये जिन्दगी को बदलने वाला एजेंट है । ये पुराने का हटाकर नए के लिए जगह बनाता है । 

आज नया आप है, मगर एक दिन ओ यहाँ से बहुत दूर नहीं है, आप बूढ़े होंगे और आपकी जगह साफ की जाएगी नाटकीय होने के लिए क्षमा चाहता हूँ मगर यही सच है । 
आपके पास समय कम है, इसे दूसरों की जिन्दगी जीने में बर्बाद नहीं करो सिद्धांतों में ना फर्स – जो दूसरे लोगों की सोच के नतीजे है ।
 दूसरी के ख्यालों की सोच को अपनी अंदरूनी आवाज़ पर भारी ना पड़ने दे और सबसे जरूरी बात, अपने दिल और अपनी अंतर – आवाज की सुनने का हौसला रखें पता नहीं कैसे उन्हें पहले ही पता होता है आप क्या बनना चाहते हैं । बाकि सब उसके बाद है ।

 जब मैं जवान था, तो एक कमाल का प्रकाशन या जिसका नाम याद होल वर्ल कैटलॉग, जो मेरी पीढ़ी का बाइबिल हआ करता या इस स्टीवर्ड ब्रांड नाम के आदमी ने बनाया था जो यहाँ से बहुत दूर नहीं मैलो पार्क में रहता था, और उसने इसमें अपनी कविताओं से जान फूक दी थी ।

 यह 1960 के आखिर की बात है, निजी कम्यूटरों और डेस्कटॉप पब्लिशिंग के पहले की, इसलिए ये सब टाइपराइटर, कैदी और पोलारोड कैमेरों से बनाया हुआ था ।

 ये एक तरह से किताब के रूप में गूगल था, गूगल के आने के 35 साल पहले यह आदर्शवादी था, और कमाल के उपकरण और महान ख्याली से भरा हुआ था।

स्टीवर्ट और उसकी टीम ने द होल अर्थ कैटलॉग के कई अंक निकाले और जब वह अपना समय पूरा कर चुका था, तो उन्होंने एक आखरी अंक निकाला ।

 1970 की बात है, मैं आपकी उम्र का था । उनके आखरी पन्ने पर गाँव की सड़क की सुबह – सुबह की एक तस्वीर थी, ऐसी जगह जहाँ अगर आप शौकीन है तो आप खुद पूमने जाना चाहेंगे । उसके नीचे लिखा था : ‘ भूखे रहिये | बेवकूफ रहिये । ये उनका जाते – जाते आखरी पैगाम था |

 भूखे रहिये । बेवकूफ रहिये । और मैंने अपने लिए हमेशा ये ही कामना की है । और आज जब आप सब ग्रेजुएट हो कर एक नई शुरुआत कर रहे हैं, ये ही कामना में आपके लिए करता है । भूखे रहिये | बेवकूफ रहिये

 Conclusion:

Steve Jobs | तो यह कहानियाँ आपको हमारी वेबसाइट Sabse Bhadiya Kahaniya | Hindi Short Stories की किसी लगी आशा करती हु आपको पसंद आयी होगी ऐसी हे मजेदार कहानियाँ पढ़ने के लिए हमारे Newsletter को Subscribe करे।

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