Short Hindi Story with Moral | Bhadiya Kahaniya

Top 2 Short Hindi story with Moral | Gajab Kahaniya


Short Hindi story with Moral |तो दोस्तों कैसे है आप लोग Sabse Bhadiya Kahaniya | Short Hindi Stories मैं आप सबका स्वागत हैं उम्मीद है अपना और अपने परिवार जनो का ख्याल रख रहे है।

मैं आज आपके लिए फिर से बहुत अच्छी कहानी लाई हूँ।

अगर आपको school यह फिर College से कोई ऐसा काम मिला है की आपको हिंदी में छोटी motivation or moral मिलने वाली stories लिख कर लानी है तो आप बिलकुल सही जगह आये है। 

मैंने इस कहनी की outline काफी पहले ही बना ली थी पर मैं dialogue पर काम कर रहा थी आखिर कार मैंने व भी पूरा कर लिया है और अब यह कहानी पूरी तरह से तैयार है।

यह सब आप लोगो का प्रेम है की मुझे हर रोज़ नई कहानी आप लोगो क लिए present करने का मौका प्राप्त होता है। 

यह कहानी बनाने मैं  मुझे थोड़ा वक़्त तो लग था लेकिन जैसा की मेरी आदत है मैं  पूरी खोशिश करती हूँ की एक दिन मैं काम से काम एक story तो लिखू लु हाँ ये मुश्किल है पर असंभव नहीं। 
तो बिना समय ख़राब किये चलिए मैं आपको इस कहानी के बारे मैं बताती हूँ।
यह कहानी एक चोर और राजा की है जिसमे चोर ने बड़ी बुद्धिमानी से राजा क साथ-साथ उसके मंत्रियो को भी विचार में ढाल दिया। तो आइए देखते है की चोर ने ऐसा क्या किया…

कहानी की शुरुवात…  

1. बुद्धिमान चोर (Clever Thief)

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Best Hindi Story 

चित्र स्तोत्र: Shutterstock

जिसने कभी पाप ना किया हो एक आदमी ने एक बार कुछ खाना चुराया और राजा ने उसे फाँसी देने का हुक्म सुना दिय |

जब उससे पूछा गया कि उसे कुछ कहना है तो चोर ने कहा ,

” ओ महाराज , मैं बस आपको यह बताना चाहता हूँ कि मैं सेब का एक बीज लगाऊंगा और रातभर में बड़ा होकर वह फल भी देने लग जायेगा |


 यह एक राज़ है जो मेरे पिताजी ने मुझे सिखाया था और मुझे बहुत दुःख होगा अगर ये राज़ मेरे साथ ही खत्म हो जायेगा ।”  

अगले दिन बीज लगाने का समय तय किया गया | चोर ने एक खडडा खोदा और कहा ,

” ये बीज सिर्फ वही लगा सकता है जिसने जीवन में कभी कुछ चुराया ना हो, ना ही ऐसी कोई चीज़ ली हो जिसपर उसका हक ना हो | 


मैं तो चोर हूँ । मैं इसे नहीं लगा पाउँगा । “

राजा ने अपने प्रधानमंत्री से बीज लगाने को कहा मगर कछ हिचकिचाहट के साथ उसने कहा ,

 ” महाराज , मझे याद है , जब मैं छोटा था तब मैंने एक चीज़ ऐसी रखी थी जो मेरी नहीं थी । मैं बीज नहीं लगा पाउँगा 

जब कोषाध्यक्ष को बीज लगाने को कहा गया , उसने राजा से क्षमा मांगते हुए कहा,

 कि ऐसा हो सकता है उसने किसी का पैसा चुराया हो | 

राजा का नंबर आया तो उन्हें याद आया कि उन्होंने अपने पिता की एक मूल्यवान वस्तु एक बार रख ली चोर ने उन सबको संबोधित करते हुए कहा ,

‘ आप सब इतने बड़े – बड़े दिग्गज लोग हैं । आपको किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं है, मगर आप एक बीज नहीं लगा सके मगर मैंने थोडा सा खाना चुराया तो मुझे फांसी की सज़ा दे दी राजा ने 

उस आदमी की दीपिक कर दिया उस आदमी की बुद्धि की तारीफ की और उसे माफ कर दिया।

Moral: 

बुद्धि का ऐसा उपयोग करिए कि लोग आपके जवाब पर तर्क ना कर सके । सबको आपकी बात उनके ना चाहते हुए भी मानना पढ़े । सख्ती से नहीं बल्कि प्रेम से ।


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2. लकड़हारे की कहानी (Story of wood cutter man)

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Short Hindi Story with Moral 
चित्र स्तोत्र: Pixabay

एक बार एक मज़बूत लकडहारे ने एक लकड़ी के व्यापारी से काम माँगा और उसे काम मिल गया| 
पैसे अच्छे मिल रहे थे और काम भी अच्छा था| इसलिए लकडहारा भी मन लगा कर काम करना चाहता था|
उसके मालिक ने उसे एक कुल्हाड़ी दी और उसे उसके काम करने की जगह बताई।
पहले दिन, लकड़हारा बहुत खुश हुआ था की उसे कही काम करने का अवसर प्राप्त हुआ है और व अपने परिवार का भरण पोषण अब कर सकता है। 
वो जंगल मैं गया और पहले दिन व खुश था और काम में मन भी था तो उसने पहले दिन 18 पेड़ काट कर लेकर आया|
“मुबारक हो,” मालिक ने कहा| “अब उस तरफ जाओ!” और थोड़ा आराम कर लो थक गए होगे ।

और  वह कुछ भोजन  भी  है जाते वक़्त अपने  परिवार  क लिए लेते  जाना  और थोड़ी  से खीर भी आज मेरी पत्नी ने बनाई थी  तुम्हारे लिए वो भी मैंने थोड़ा  सा दिया  है। 
लकड़हारा बहुत खुश हुआ अपने परिवार के साथ समय  बिताया उस दिन उसकी पत्नी और उसका बेटा दोनों ही खीर 
खा कर बहुत खुश हुए और मालिक का शुक्रिया आदा किये।
दूसरे दिन सुबह वह पहले दिन की तरह ही Motivated था लेकिन आज उसे पेड़ कटाने में थोड़ी ताकत और लगी परन्तु व मालिक की बातों से Motivated था मगर व 15 पेड़ ही ला पाया|
धीरे-धीरे पेड़ो की संख्या काम होने लगी वह समज नहीं पा रहा था की उसके साथ क्या हो रहा है, उसे लगने लगा, “शायद मैं अपनी ताकत खो रहा हूँ। 

वह मालिक के पास गया और माफ़ी माँगी और कहा कि वह समझ नहीं पा रहा है क्या हो रहा है।
मालिक ने पूछा, “तुमने आखरी बार अपनी कुल्हाड़ी कब तेज की थी?” 

“तेज़ ? मुझे तेज़ करने का समय ही नहीं था| मैं तो पेड़ काटने में व्यस्त था। 

Moral:


हमारी ज़िन्दगी भी ऐसी ही है। कभी-कभी हम इतना व्यस्त हो जाते हैं कि कुल्हाड़ी तेज़ करने का वक्त ही नहीं निकाल पाते हैं। आज के वक्त में व्यस्त सभी हैं, मगर खुश बहुत कम है।
ऐसा क्यों है? क्या इसलिए क्योंकि हम ‘तेज’ रहना भूल चुके हैं। काम और परिश्रम करना अच्छी बात है। मगर इसका मतलब यह नहीं कि हम ज़िन्दगी की important चीज़ों को भूल जाएँ, जैसे हमारी निजी ज़िन्दगी, भगवान के साथ बिताने का समय, परिवार के साथ समय, पढ़ने का समय, आदि|
हम सबको आराम के लिए वक्त चाहिए, सोचने, जप करने, सीखने और बढ़ने के लिए वक्त चाहिए। अगर हम कुल्हाड़ी तेज़ करने को समय नहीं देंगे, तो हम कमज़ोर पड़ जायेंगे और अपना जोश खो देंगे|

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Conclusion:

तो यह थी ये दो Short Hindi Story with Moral कहानिया आशा करती हूँ आपको पसंद आयी होगी ऐसी हे मजेदार कहानियाँ पढ़ने के लिए हमारे Newsletter को Subscribe करे। 

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