5 Short Hindi Poems about Life | Deep Gyan

Top 5 Best Topics for Poems in Hindi | Inspirational


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Kavitaye

इंट्रोडक्शन:
तो दोस्तों कैसे है सब कुछ उम्मीद है की ठीक ही होगा। आज फिर से अपने दोस्तो के लिए नई कहानियां लाया हूं ।

 panchatantra stories in hindi यह कहानी लिखने के प्रेणा मुझे बच्चो के टीवी शो से मिली है हलाकि यह कहानी को मैंने थोड़ा सा दूसरा चित्र बस दिया है। मुझे आप लोगो के लिए  moral stories in hindi लाना ज़ायदा पसंद हैं। 

लेकिन फिर भी यह कहानी आप लोगो को बहुत पसंद आएगी हमेशा की तरह मुझे पूरा विश्वास है इस बात पर। 

ये कहानी जो हैं हमारे स्कूल जाने वालो दोस्तो के लिए है जीने Hindi Poems or Hindi Stories लिखने के लिए दिया जाता है ताकि आपकी यह से मदद हो सके।

तो चालिए बिना आपका वक़्त खरब किये मैं कहानी पढ़ते हैं । तो चालिए देखते है की माजरा क्या है…

1. नवनिर्माण

-त्रिलोचन
पाठ परिचय: प्रस्तुत चतुष्पदियों में कवि का आशावाद दृष्टिगोचर होता है । वर्तमान समय में सामान्य मनुष्य के लिए संघर्ष

करना अनिवार्य हो गया है । कवि मनुष्य को संघर्ष करने और अँधेरा दूर करने की प्रेरणा देते हैं । जीवन में व्याप्त अन्याय,

अत्याचार, विषमता और निर्बलता पर विजय पाने के लिए कवि बल और साहस एकत्रित करने का आवाहन करते हैं । न्याय

के लिए बल का प्रयोग करना समाज के उत्थान के लिए श्रेयस्कर होता है; इस सत्य से भी कवि अवगत कराते हैं । कवि का

मानना है कि समाज में समानता, स्वतंत्रता तथा मानवता को स्थापित करना हमारे जीवन का उद्देश्य होना चाहिए ।

तुमने विश्वास दिया है मुझको,

मन का उच्छ्‌वास दिया है मुझको ।

मैं इसे भूमि पर सँभालूँगा,

तुमने आकाश दिया है मुझको ।

सूत्र यह तोड़ नहीं सकते हैं,

तोड़कर जोड़ नहीं सकते हैं ।

व्योम में जाएँ, कहीं भी उड़ जाएँ,

भूमि को छोड़ नहीं सकते हैं ।

नीति की राह पर चले आओ ।

वह तुम्हारी ही नहीं, सबकी है,

गीति की राह पर चले आओ ।

साथ निकलेंगे आज नर-नारी,

लेंगे काँटों का ताज नर-नारी ।

दोनों संगी हैं और सहचर हैं,

अब रचेंगे समाज नर-नारी ।

वर्तमान बोला, अतीत अच्छा था,

प्राण के पथ का मीत अच्छा था ।

गीत मेरा भविष्य गाएगा,

यों अतीत का भी गीत अच्छा था ।

    – (‘चुनी हुईं कविताएँ’ संग्रह से)

Hindi Kavita

(2) सच हम नहीं; सच तुम नहीं

– डॉ. जगदीश गुप्त

Mast kavitaye

पाठ परिचय: प्रस्तुत नयी कविता में कवि संघर्ष को ही जीवन की सच्चाई मानते हैं । सच्चा मनुष्य वही है जो कठिनाइयों से

घबराकर, मुसीबतों से डरकर न कभी झुके, न रुके, परिस्थितियों से हार न माने । राह में चाहे फूल मिलें या शूल, वह चलता

रहे क्योंकि जिंदगी सहज चलने का नाम नहीं बल्कि लीक से हटकर चलने का नाम है । हमें अपनी क्षमताएँ स्वयं ही पहचाननी

होंगी । राह से भटककर भी मंजिल अवश्य मिलेगी। भीतर-बाहर से एक-सा रहना ही आदर्श है । हमें अपने दुखों को

पहचानना होगा, अपने आँसू स्वयं पोंछने होंगे तथा स्वयं योद्धा बनना होगा । जीवन संघर्ष की यही कहानी है ।

सच हम नहीं, सच तुम नहीं ।

सच है सतत संघर्ष ही ।

संघर्ष से हटकर जीए तो क्या जीए, हम या कि तुम ।

जो नत हुआ, वह मृत हुआ ज्यों वृंत से झरकर कुसुम ।

जो पंथ भूल रुका नहीं,

जो हार देख झुका नहीं,

जिसने मरण को भी लिया हो जीत, है जीवन वही ।

सच हम नहीं, सच तुम नहीं ।

ऐसा करो जिससे न प्राणों में कहीं जड़ता रहे ।

जो है जहाँ चुपचाप, अपने-आपसे लड़ता रहे ।

जो भी परिस्थितियाँमिलें,

काँटे चुभें, कलियाँखिलें,

टूटे नहीं इनसान, बस ! संदेश यौवन का यही ।

सच हम नहीं, सच तुम नहीं ।

हमने रचा, आओ ! हमीं अब तोड़ दें इस प्यार को ।

यह क्या मिलन, मिलना वही, जो मोड़ दे मँझधार को ।

जो साथ फूलों के चले,

जो ढाल पाते ही ढले,

यह जिंदगी क्या जिंदगी जो सिर्फ पानी-सी बही ।

सच हम नहीं, सच तुम नहीं ।

अपने हृदय का सत्य, अपने-आप हमको खोजना ।

अपने नयन का नीर, अपने-आप हमको पोंछना ।

आकाश सुख देगा नहीं

धरती पसीजी है कहीं!

हर एक राही को भटककर ही दिशा मिलती रही ।

सच हम नहीं, सच तुम नहीं ।

बेकार है मुस्कान से ढकना हृदय की खिन्नता ।

आदर्श हो सकती नहीं, तन और मन की भिन्नता ।

जब तक बँधी है चेतना

जब तक प्रणय दुख से घना

तब तक न मानूँगा कभी, इस राह को ही मैं सही ।

सच हम नहीं, सच तुम नहीं ।

    – (‘नाव के पाँव’ कविता संग्रह से)

Hindi Poems Inspirational

(3) गुरुबानी

– गुरु नानक

Guru Nanak Ji

पाठ परिचय: प्रस्तुत दोहों तथा पदों में गुरु नानक ने गुरु की महिमा, कर्म की महानता, सच्ची शिक्षा आदि विषयों पर अपने

विचार व्यक्त किए हैं । मनुष्य के जीवन को उदात्त और चरित्रवान बनाने में गुरु का मार्गदर्शन, मनुष्य के उत्तम कार्य और

सच्ची शिक्षा का बहुत बड़ा योगदान रहता है । गुरु द्वारा दिया जाने वाला ज्ञान ही शिष्य की सबसे बड़ी पूँजी है । संसार मनुष्य

की जाति का नहीं अपितु उसके उत्तम कर्मों का सम्मान करता है । मनुष्य का श्रेष्ठत्व उसके अच्छे कर्मों से सिद्ध होता है न

कि उसकी जाति अथवा वर्ग से । गुरु नानक ने कर्मकांड और बाह्याडंबर का घोर विरोध किया ।

नानक गुरु न चेतनी मनि आपणे सुचेत ।

छूते तिल बुआड़ जिऊ सुएं अंदर खेत ।।

खेते अंदर छुट्टया कहु नानक सऊ नाह ।

फली अहि फूली अहि बपुड़े भी तन विच स्वाह ।। १ ।।

जलि मोह घसि मसि करि,

मति कागद करि सारु,

भाइ कलम करि चितु, लेखारि,

गुरु पुछि लिखु बीचारि,

लिखु नाम सालाह लिखु,

लिखु अंत न पारावार ।। २ ।।

मन रे अहिनिसि हरि गुण सारि ।

जिन खिनु पलु नामु न बिसरे ते जन विरले संसारि ।

जोति-जोति मिलाइये, सुरती-सुरती संजोगु ।

हिंसा हउमें गतु गए नाहीं सहसा सोगु ।

गुरु मुख जिसु हार मनि बसे तिसु मेले गुरु संजोग ।। ३ ।।

तेरी गति मिति तू ही जाणै क्या को आखि वखाणे

तू आपे गुपता, आपे प्रगटु, आपे सब रंग भाणे

साधक सिद्ध, गुरु वहु चेले खोजत फिरहि फरमाणे

समहि बधु पाइ इह भिक्षा तेरे दर्शन कउ कुरवाणे

उसी की प्रभु खेल रचाया, गुरमुख सोभी होई ।

नानक सब जुग आपे वरते, दूजा और न कोई ।। 4 ।।

गगन में काल रविचंद दीपक बने ।

तारका मंडल जनक मोती ।

धूप मलयानिल, पवनु चँवरो करे,

सकल वनराइ कुलंत जोति ।

कैसी आरती होई भव खंडना, तोरि आरती ।

अनाहत शबद बाजत भेरी ।। 5 ।।

    – (‘गुरुग्रंथसाहिब’ से)

Famous Hindi Poet

(4) वृंद के दोहे

– वृंद

पाठ परिचय: प्रस्तुत दोहों में कवि वृंद ने कई नीतिपरक बातों की सीख दी है । विद्या रूपी धन की विशेषता यह होती है कि

वह खर्चकरने पर भी बढ़ता जाता है । आँखें मन की सच-झूठ बातें बता देती हैं । जितनी चादर हो, मनुष्य को उतने ही पाँव

फैलाने चाहिए । व्यवहार में कपट को स्थान नहीं देना चाहिए । बिना गुणों के मनुष्य को बड़प्पन नहीं मिलता । दुष्ट व्यक्ति से

उलझने पर कीचड़ हमपर ही उड़ता है । संसार में सद्‌गुणों के कारण ही व्यक्ति को आदर प्राप्त होता है ।

कवि वृंद के दोहे पाठकों को व्यावहारिक अनुभवों से परिचित कराते हैं, जीवन का सच्चा मार्ग दिखाते हैं ।

सरसुति के भंडार की, बड़ी अपूरब बात ।

ज्यौं खरचै त्यौं-त्यौं बढ़ै, बिन खरचे घटि जात ।।

नैना देत बताय सब, हिय को हेत-अहेत ।

जैसे निरमल आरसी, भली बुरी कहि देत ।।

अपनी पहुँच बिचारि कै, करतब करिए दौर ।

तेते पाँव पसारिए, जेती लाँबी सौर ।।

फेर न ह्‌वै हैं कपट सों, जो कीजै ब्यौपार ।

जैसे हाँड़ी काठ की, चढ़ै न दूजी बार ।।

ऊँचे बैठे ना लहैं, गुन बिन बड़पन कोइ ।

बैठो देवल सिखर पर, वायस गरुड़ न होइ ।।

उद्यम कबहुँ न छाँड़िए, पर आसा के मोद ।

गागरि कैसे फोरिए, उनयो देखि पयोद ।।

कछु कहि नीच न छेड़िए, भलो न वाको संग ।

पाथर डारै कीच मैं, उछरि बिगारै अंग ।।

जो पावै अति उच्च पद, ताको पतन निदान ।

ज्यौं तपि-तपि मध्याह्न लौं, अस्त होतु है भान ।।

जो जाको गुन जानही, सो तिहि आदर देत ।

कोकिल अंबहि लेत है, काग निबौरी लेत ।।

आप अकारज आपनो, करत कुबुध के साथ ।

पाय कुल्हाड़ी आपने, मारत मूरख हाथ ।।

कुल कपूत जान्यो परै, लखि सुभ लच्छन गात ।

होनहार बिरवान के, होत चीकने पात ।।

    – (‘वृंद सतसई’ संग्रह से)।

Hindi Poems About Life

(5) पेड़ होने का अर्थ

– डाॅ. मुकेश गौतम
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Short Hindi Poems
पाठ परिचय: प्रकृति मनुष्य के जीवन का स्पंदन है औैर पेड़ इस स्पंदन का पोषक तत्त्व है । पेड़ मनुष्य का बहुत बड़ा शिक्षक

है । पेड़ और मनुष्य के बीच पुरातन संबंध रहा है । पेड़ ने भारतीय संस्कृति को जीवित रखा है और मनुष्य को संस्कारशील

बनाया है । पेड़ मनुष्य का हौसला बढ़ाता है, समाज के प्रति दायित्व और प्रतिबद्धता का निर्वाह करना सिखाता है और सच्ची

पूजा का अर्थ समझाता है । कवि ने मनुष्य जीवन में पेड़ की विभिन्नार्थी भूमिकाओं को स्पष्ट करते हुए उसके होने की

आवश्यकता की ओर संकेत किया है । सब कुछ दूसरों को देकर पेड़ जीवन की सार्थकता को सिद्ध करता है ।

आदमी पेड़ नहीं हो सकता…

कल अपने कमरे की

खिड़की के पास बैठकर,

जब मैं निहार रहा था एक पेड़ को

तब मैं महसूस कर रहा था पेड़ होने का अर्थ !

मैं सोच रहा था

आदमी कितना भी बड़ा क्यों न हो जाए,

वह एक पेड़ जितना बड़ा कभी नहीं हो सकता

या यूँ कहूँकि-

आदमी सिर्फ आदमी है

वह पेड़ नहीं हो सकता!

हौसला है पेड़…

अंकुरित होने से ठूँठ हो जाने तक

आँधी-तूफान हो या कोई प्रतापी राजा-महाराजा

पेड़ किसी के पाँव नहीं पड़ता है,

जब तक है उसमें साँस

एक जगह पर खड़े रहकर

हालात से लड़ता है!

जहाँ भी खड़ा हो

सड़क, झील या कोई पहाड़

भेड़िया, बाघ, शेर की दहाड़

पेड़ किसी से नहीं डरता है !

हत्या या आत्महत्या नहीं करता है पेड़ ।

थके राहगीर को देकर छाँव व ठंडी हवा

राह में गिरा देता है फूल

और करता है इशारा उसे आगे बढ़ने का ।

पेड़ करता है सभी का स्वागत,

देता है सभी को विदाई !

गाँव के रास्ते का वह पेड़

आज भी मुस्कुरा रहा है

हालाँकि वह सीधा नहीं, टेढ़ा पड़ा है

सच तो यह है कि-

रात भर तूफान से लड़ा है

खुद घायल है वह पेड़

लेकिन क्या देखा नहीं तुमने

उसपर अब भी सुरक्षित

चहचहाते हुए चिड़िया के बच्चों का घोंसला है

जी हाँ, सच तो यह है कि

पेड़ बहुत बड़ा हौसला है ।

दाता है पेड़…

जड़, तना, शाखा, पत्ती, पुष्प, फल और बीज

हमारे लिए ही तो है पेड़ की हर एक चीज !

किसी ने उसे पूजा,

किसी ने उसपर कुल्हाड़ी चलाई

पर कोई बताए

क्या पेड़ ने एक बूँद भी आँसू की गिराई?

हमारी साँसों के लिए शुद्ध हवा

बीमारी के लिए दवा

शवयात्रा, शगुन या बारात

सभी के लिए देता है पुष्पों की सौगात

आदिकाल से आज तक

सुबह-शाम, दिन-रात

हमेशा देता आया है मनुष्य का साथ

कवि को मिला कागज, कलम, स्याही

वैद, हकीम को दवाई

शासन या प्रशासन

सभी के बैठने के लिए

कुर्सी, मेज, आसन

जो हम उपयोग नहीं करें

वृक्ष के पास ऐसी एक भी नहीं चीज है

जी हाँ, सच तो यह है कि

पेड़ संत है, दधीचि है ।

– (‘प्रेम समर्थक हैं पेड़’ कविता संग्रह से)

Conclusion:

तो कैसी लगी आप लोगो यह Top 5 Topics for poems in Hindi तो जैसा की आप देख सकते है की यह छोटी सी कविताएँ हमे कितनी बड़ी सीख देती है।

आशा करता हूँ आपको मेरी म्हणत पसंद आयी ये Poems मैंने किताब के पढ़ा था लेकिन सबके पास किताब नहीं रहता हैं आज के ज़माने मैं पर phone सबके पास है तो मैंने इसे एक digital रूप दिया ताकि आप सब पढ़ सके।

तो यह कहानी आशा करती हु आपको पसंद आयी होगी ऐसी हे मजेदार कहानियाँ पढ़ने के लिए हमारे Newsletter को Subscribe करे। मेरी कहानी पढ़ने क लिए आपका बोहोत बोहोत धन्यवाद ।

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